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Showing posts from November, 2017

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आशिफ़ा के बलात्कारी पे आक्रोश व्यक्त करती कविता!

बेटियों पे हो रहे अत्याचार पे एक मर्मम कविता!

"मेरा देश आज बदल रहा है"
"मेरा देश आज सुधर रहा है"
"आज आशिफ़ा के मौत पे इंसानियत सबमे उमड़ रहा है"
"मेरा देश आज फिर से बदल रहा है"!

"हुआ था यही नाटक 2012 में"
"जब खेला था दरिंदों ने निर्भया कि आंहो से"
"फिर से वही इंसानियत सबमे उमड़ रहा है"
"मेरा देश आज फिर से बदल रहा है"!

"कहा थी इंसानियत जब आशिफ़ा की चीखों पे सबने मुह मोड़ा था"
" क्या उस वक़्त इंसानियत ने उनका साथ छोड़ा"
" इंसानियत की दौड़ में वो दरिंदा भी दौड़ रहा है"
" मेरा देश आज फिर से बदल रहा है"!

" कह दो उन दरिंदों से किसी दिन उनकी बिटिया भी होगी इस कतार में"
" रोने को ना मिलेगा जगह उन्हे इस पूरे संसार में"
" आज हर बिटिया का पिता उसके दुर्भाग्य पे रो रहा है"
" मेरा देश आज फिर से बदल रहा है"!

" कह रहा है सचिन मिश्रा इन वहसी दरिंदों से"
" बिटिया होंगी तुम्हारी भी डरो उन दिनों से"
" आज सबकी इंसानियत मो…

Hindi Poem

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Good Morning Images

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बुलेट ट्रेन की कहानी, एक गरीब की जुबानी

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 बुलेट ट्रेन की कहानी, एक गरीब की जुबानी
जैसे ही ट्रेन रवाना होने को हुई, एक औरत और उसका पति एक ट्रंक लिए डिब्बे में घुस पडे़। दरवाजे के पास ही औरत तो बैठ गई पर आदमी चिंतातुर खड़ा था। जानता था कि उसके पास जनरल टिकट है और ये रिज़र्वेशन डिब्बा है। टीसी को टिकट दिखाते उसने हाथ जोड़ दिए। ये जनरल टिकट है। अगले स्टेशन पर जनरल डिब्बे में चले जाना। वरना आठ सौ की रसीद बनेगी। कह टीसी आगे चला गया। पति-पत्नी दोनों बेटी को पहला बेटा होने पर उसे देखने जा रहे थे।सेठ ने बड़ी मुश्किल से दो दिन की छुट्टी और सात सौ रुपये एडवांस दिए थे। बीबी व लोहे की पेटी के साथ जनरल बोगी में बहुत कोशिश की पर घुस नहीं पाए थे। लाचार हो स्लिपर क्लास में आ गए थे। साब, बीबी और सामान के साथ जनरल डिब्बे में चढ़ नहीं सकते।हम यहीं कोने में खड़े रहेंगे।बड़ी मेहरबानी होगी। टीसी की ओर सौ का नोट बढ़ाते हुए कहा। सौ में कुछ नहीं होता। आठ सौ निकालो वरना उतर जाओ। आठ सौ तो गुड्डो की डिलिवरी में भी नहीं लगे साब।नाती को देखने जा रहे हैं।गरीब लोग हैं, जाने दो न साब। अबकि बार पत्नी ने कहा। तो फिर ऐसा करो, चार सौ निकालो।एक की रसीद बना देता ह…

भूखा बच्चा

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भूखा बच्चा



गरमी का मौसम था, मैने सोचा काम पे जाने से पहले गन्नेका रस पीकर काम पर जाता हूँ।एक छोटे से गन्ने की रस की दुकान पर गया !! वह काफी भीड-भाड का इलाका था, वहीं पर काफी छोटी-छोटी फूलो की, पूजा की सामग्री ऐसी और कुछ दुकानें थीं। और सामने ही एक बडा मंदिर भी था , इसलिए उस इलाके में हमेशा भीड रहती है ! मैंने रस का आर्डर दिया , मेरी नजर पास में ही फूलों की दुकान पे गयी , वहीं पर एक तकरीबन 37 वर्षीय सज्जन व्यक्ति ने 500 रूपयों वाले फूलों के हार बनाने का आर्डर दिया , तभी उस व्यक्ति के पिछे से एक 10 वर्षीय गरीब बालक ने आकर हाथ लगाकर उसे रस की पिलाने की गुजारिश की !! पहले उस व्यक्ति का बच्चे के तरफ ध्यान नहीं था , जब देखा....तब उस व्यक्ति ने उसे अपने से दूर किया और अपना हाथ रूमाल से साफ करते हुए" चल हट ...." कहते हुए भगानेकी कोशिश की !! उस बच्चे ने भूख और प्यास का वास्ता दिया !! वो भीख नहीं मांग रहा था , लेकिन उस व्यक्ति के दिल में दया नहीं आयी !! बच्चे की आँखें कुछ भरी और सहमी हुई थी, भूख और प्यास से लाचार दिख रहा था !! इतने में मेरा आर्डर दिया हुआ रस आ गया !!
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उरी आतंकवादी हमला

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"अंधों को दर्पण क्या देना, बहरों को भजन सुनाना क्या.?
 जो रक्त पान करते उनको, गंगा का नीर पिलाना क्या.?" . "हमने जिनको दो आँखे दीं, वो हमको आँख दिखा बैठे.!  हम शांति यज्ञ में लगे रहे, वो श्वेत कबूतर खा बैठे.!" .  "वो छल पे छल करता आया, हम अड़े रहे विश्वासों पर.! कितने समझौते थोप दिए, हमने बेटों की लाशों पर.!"
 "अब लाशें भी यह बोल उठीं, मतअंतर्मन पर घात करो.! "दुश्मन जो भाषा समझ सके, अब उस भाषा में बात करो.!" "वो झाड़ी है, हम बरगद हैं, वो है बबूल हम चन्दन हैं  "वो है जमात गीदड़ वाली, हम सिंहों का अभिनन्दन हैं.!"
 "ऐ पाक तुम्हारी धमकी से, यह धरा,नहीं डरने वाली.! "यह अमर सनातन माटी है, ये कभी नहीं मरने वाली.!" . "तुम भूल गए सन अड़तालिस, पैदा होते ही अकड़े थे.! हम उन कबायली बकरों की गर्दन हाथों से पकडे थे.!" . "तुम भूल गए सन पैसठ को, तुमने पंगा कर डाला था.! छोटे से लाल बहादुर ने तुमको नंगा कर डाला था.!" . "तुम भूले सन इकहत्तर को, जब तुम ढाका पर ऐंठे थे.! नब्बे हजार पाकिस्तानी, घुटनों के बल पर ब…
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