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Happy Republic Day 2018

Wishing You Happy Republic Day.




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ज़माने भर में मिलते है आशिक़ कई,
मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता,
नोटों में लिपट कर, सोने में सिमट कर मरे है कई,
मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता.
गणत्रंता दिवस की हार्दिक सुभ कामनाये


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खुशनसीब थे वो लोग जिनका जन्म 1960 से 1995 में हुआ था

खुशनसीब थे वो लोग जिनका जन्म 1960 से 1995 में हुआ था

हम सभी लोग इस धरती पर जन्म लेकर कई साल बीत चुके होंगे। हमारे सभी लोगों के पास जीवन से जुड़े कुछ अनमोल चीजे, यादें होती है और इनमें से कई यादें हमारे बचपन से जुड़ी होती है। हम सभी लोग हमारे बचपन को हम कभी भी नहीं भूलते। हम सभी लोग बचपन में बहुत खेले कूदे यह हम सभी को मालूम है। कई लोग अपने बचपन की बातें वह कहीं लिखकर रखते हैं तो कई अपने दिमाग में लिखकर रखते हैं।

मुझे अपने बचपन के यादें बहुत अच्छे लगते हैं आपको अगर आप के बचपन के यादे अच्छे लगते हैं तो नीचे कमेंट करके बताना। तो आज हम ऐसे ही उन लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं कि जिनका जन्म 1960 से 1995 में हुआ था, तो चलिए जानते हैं।




तो चलिए याद करते हैं कुछ बचपन की बातें :-
1. बात उन दिनों की है जब हम 5-6 साल के थे उस काल में पैसों का चलन होता था। जब 5 से 10 पैसे में हमको वह सारी चीजें मिलती थी जिससे हर बच्चा खुश होता था।



2. सबसे पहले हम उस 5 से 10 पैसों का हम सफेद प्लास्टिक में लिपटी हुई छोटी-छोटी ऑरेंज की टॉफी खरीदते थे और भागते भागते हुए घर आते थे।

3. दूसरी बात याद करते हैं तो वे है पारले-जी चॉकलेट उन दिनों में पारले-जी टॉफी या चॉकलेट बहुत ही फेमस था और हम उन पैसों से पारले-जी टॉफी 50 पैसों में 2 से 4 खरीदते थे।



4. जब मैं छोटा था, शायद दुनिया बहुत बड़ी हुआ करती थी। मुझे याद है मेरे घर से स्कूल तक का वो रास्ता, क्या क्या नहीं था वहां चाट के ठेले, जलेबी की दुकान, बर्फ के गोले, सब कुछ अब वहां मोबाइल शॉप, विडियो पार्लर हैं, फिर भी सब सूना है। शायद अब दुनिया सिमट रही है।

5. चाहे वह डेरी मिल्क, केडबरी या किटकैट जैसे चॉकलेट क्यों ना हो हमें उन दिनों के ही चॉकलेट बहुत ही अच्छे लगते थे। उन दिनों के चॉकलेट में अपनापन महसूस होता था जो आज नहीं होता है। हमारे सारे बच्चे आज डेरी मिल्क, केडबरी या किटकैट जैसे चॉकलेट से ही उन्हें राहत मिलती है क्योंकि यह नया जमाना है।

6. हम सभी लोग स्कूल में जाते थे और स्कूल में बैठते थे लेकिन हमारा मन बाहर की तरफ ही खींचता था। जब स्कूल छूटेगा और हम बर्फ के गोले खाने के लिए कब दौड़ेंगे यही सब हमारे मन में चलता रहता था।



7. जब मैं छोटा था, तब खेल भी अजीब हुआ करते थे। छुपन छुपाई, लंगडी टांग, पोषम पा, कट केक, टिप्पी टीपी टाप,अब internet, office, से फुर्सत ही नहीं मिलती। शायद ज़िन्दगी बदल रही है।



आप अपने बचपन में क्या-क्या खाए, पिए या खेले ये सभी बातें आप हमें कमेंट में बताइए, ताकि हमें भी एहसास हो कि आपको भी बचपन की यादें आती है।

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