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आशिफ़ा के बलात्कारी पे आक्रोश व्यक्त करती कविता!

बेटियों पे हो रहे अत्याचार पे एक मर्मम कविता!

"मेरा देश आज बदल रहा है"
"मेरा देश आज सुधर रहा है"
"आज आशिफ़ा के मौत पे इंसानियत सबमे उमड़ रहा है"
"मेरा देश आज फिर से बदल रहा है"!

"हुआ था यही नाटक 2012 में"
"जब खेला था दरिंदों ने निर्भया कि आंहो से"
"फिर से वही इंसानियत सबमे उमड़ रहा है"
"मेरा देश आज फिर से बदल रहा है"!

"कहा थी इंसानियत जब आशिफ़ा की चीखों पे सबने मुह मोड़ा था"
" क्या उस वक़्त इंसानियत ने उनका साथ छोड़ा"
" इंसानियत की दौड़ में वो दरिंदा भी दौड़ रहा है"
" मेरा देश आज फिर से बदल रहा है"!

" कह दो उन दरिंदों से किसी दिन उनकी बिटिया भी होगी इस कतार में"
" रोने को ना मिलेगा जगह उन्हे इस पूरे संसार में"
" आज हर बिटिया का पिता उसके दुर्भाग्य पे रो रहा है"
" मेरा देश आज फिर से बदल रहा है"!

" कह रहा है सचिन मिश्रा इन वहसी दरिंदों से"
" बिटिया होंगी तुम्हारी भी डरो उन दिनों से"
" आज सबकी इंसानियत मो…

aarakshan poem

 hindi poem

करता हूं अनुरोध आज मैं , 
भारत की सरकार से , 
"प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से........."

 "वर्ना रेल पटरियों पर जो , फैला आज तमाशा है ," 
" जातिवाद आन्दोलन से फैली , चारो ओर निराशा है........."

"अगला कदम पंजाबी बैठेंगे , महाविकट हडताल पर ," "महाराष्ट में प्रबल मराठा , चढ़ जाएंगे भाल पर........."

"राजपूत भी मचल उठेंगे , भुजबल के हथियार से ," "प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से........."

"निर्धन ब्राम्हण वंश एक , दिन परशुराम बन जाएगा ,"
"अपने ही घर के दीपक से , अपना घर जल जाएगा........"

 "भडक उठा गृह युध्द अगर , भूकम्प भयानक आएगा ," "आरक्षण वादी नेताओं का , सर्वस्व मिटाके जायेगा........"

"अभी सम्भल जाओ मित्रों , इस स्वार्थ भरे व्यापार से ,"
"प्रतिभाओं को मत काटो ,आरक्षण की तलवार से........"

"जातिवाद की नही , समस्या मात्र गरीबी वाद है ,"
"जो सवर्ण है पर गरीब है , उनका क्या अपराध है........."

"कुचले दबे लोग जिनके ,
घर मे न चूल्हा जलता है ,"
"भूखा बच्चा जिस कुटिया में , लोरी खाकर पलता है........"

 "समय आ गया है उनका , उत्थान कीजिये प्यार से ," "प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से........."

 "जाति गरीबी की कोई भी ,नही मित्रवर होती है ,"
"वह अधिकारी है जिसके घर , भूखी मुनिया सोती है........"

 "भूखे माता-पिता, दवाई बिना तडपते रहते है ," "जातिवाद के कारण , कितने लोग वेदना सहते है........."

"उन्हे न वंचित करो मित्र , संरक्षण के अधिकार से ,"
"प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से.........

इन इंसाफी दरबार से,"
"प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से.........

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